मैं आज बाजार में घूम रहा था, रात के नौ बज रहे थे , एक पान दुकान पर अपने मित्रों के साथ पान खा रहा था तभी एक बच्चा आया और भोजन के लिए पॉँच रूपये मांगने लगा , दुकान वाले ने कहा चलो जाओ अभी नही है , मेरी नजर उस पर गई , हमने उसके चेहरे पर एक दर्द भरी सिकन देखी , हमने उससे कहा कहाँ रहते हो , उसने कहा की उसके माता और पिता कचरा चुनने का कम करते हैं और वह स्टेशन के पास झोपरेमें रहता है , दो दिन से पिता काम पर नही गए हैं जिस कारण घर में खाने को कुछ नही है , इसलिए मांगने निकल गए हैं , हमारे जेब में चालीस रूपये थे मैंने उसे तीस रूपये दे दिए , उसने धन्यवाद् दिया और बगल के दुकान से दस रोटी खरीद लिए........
दुसरे दिन हमने स्टेशन के पास उसे उसके बताये गए झोपरे में ही देखा .... इसका मतलब वह सही था ....... इसलिए अपने लिए तो सब करते हैं ... अपने बच्चो के लिए वस्त्र खरीदते है ..... खिलोने खरीदते है ....... चोकलेट खरीदते हैं ....... कभी आपने उन कुपोषित बच्चो की तरफ़ देखा है ...... उसे भी जीने का हक है ....... वो भी कई हसरत लिए जमी पर आया है ....... वो भी हमारी तरह जीना चाहता है .........
चलिए आज यह प्रण करते हैं कि हम अपने के साथ उन लोगो को भी जीने का हक दिलाएंगे जो चाह कर भी ठीक से जी नही पा रहे हैं ........
