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3/31/2010

हर एक फूटपाथ हमारा घर है

उसकी आंखें कुछ कहती थी



मैं सुन रहा था उसके दर्द को


उसकी चुभन को


मेरे जेहन में उसकी हर एक हरकत


घर करती जा रही थी


हमने कहा क्यों बाबू


तुम्हारा घर कहां है


उसने कहा हर एक फूटपाथ हमारा घर है


क्या करते हो


उसने दर्द भरी आवाज में कहा


चाय की दुकान में नौकरी


कितने मिलते हैं


200 रुपया प्रतिमाह


उसकी बातें सुन मेरी दिल से आह निकल गई।


आखिर ऐसा क्यों


होता है इन बच्चों के साथ


कोई न कोई तो होगा देने वाला इनका साथ।


इनके हाथ में हाथ हमें ही देना होगा


इन्हें रास्ते पर लाने का संकल्प?


हमें ही लेना होगा।