एक बता दूं कि यहां एक कहावत चरितार्थ है। एक महीने कमाओ साल भर खाओ।
दूर दूर से लोग पूरे महीने यहां कमाने आते हैं। छोटे छोटे दुकानों की भरमार रहती है। कोई शहर का कोई हिस्सा खाली नहीं रहता। पूरे महीने अरबों का व्यवसाय होता है। सबसे ज्यादा प्रसाद के रूप में बिकने वाले पेड़ा व इलाईची दाना का। रोज करोड़ों का व्यवसाय होता है। और हो भी क्यों नहीं लाखों की भीड़ जो जुटती है। श्रावण महीना में इस तरह का नजारा कहीं देखने को नहीं मिलता।
बाबा बैद्यनाथ की पूजा के लिए पूरे महीने रोजाना लंबी कतार लगी रहती है। विशेषत: सोमवार व मंगलवार के दिन। कहते हैं पहले इस तरह की भीड़ नहीं जुटती थी। धीरे धीरे बदलाव आया और मेला का फलक भी बढ़ा। मीडिया कर्मी भी पूरे महीने सावन की खबरों के संकलन में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। वे भी अपना फलक बढ़ाने में लगे रहते हैं।
सुल्तानगंज से देवघर तक पांव पैदल आने वाले कांवरियों की कतार पूरे महीने लगी रहती है। कतार ऐसा कि कोई एक डब्बा यदि कांवरियों के हाथ दे दिया जाय तो एक दूसरे को बढ़ाते बढ़ाते वह डब्बा देवघर आ जायेगा।
रावणेश्वर बैद्यनाथ की महिमा ही निराली है। सभी बाबा भोले की मस्ती में मस्त रहते हैं सभी बोल बम की रट लगाए रहते हैं। उनके मुख से बोल बम का शब्द निकला कामन हो जाता है। एक दूसरे को बम कहकर ही पुकारते हैं।

