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3/07/2010

महिला दिवस

महिला दिवस : लोग समारोह आयोजित कर महिलाओं को जागृत करने का संकल्‍प तो लेते हैं लेकिन संकल्‍प सिर्फ समारोह तक ही सीमित रहता है। यह संकल्‍प समारोह स्‍थल से बाहर नहीं निकल पाता है। पहले हमारे द्वारा लिए गए संकल्‍प को और सशक्‍त बनाना होगा। तभी महिला सशक्तिकरण को सही अर्थ मिल सकता है। महिलाओं को सही दिशा मिल सकती है।
इन्‍हें देखिए:::: ये बच्‍ची फूटपाथ पर पापकार्न बनाने का काम कर रही है। लोग पांच रुपया दस रुपया देकर इसे खरीद कर ले जायेंगे। लेकिन उन्‍हें सशक्तिकरण से जोड़ने का कोई प्रयास नहीं करेंगे। ये बच्‍ची दिन भर में मुश्किल से पचास रुपया कमा पाती है। ऐसे में 10 सदस्‍यों वाला परिवार कैसे चल पायेगा। यह इसके लिए यक्ष प्रश्‍न है।

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