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2/15/2010

क्‍या होगा हमारी संस्‍कृति का

वेलेनटाईन डे
आखिर क्‍या है वेलेनटाईन डे। हमने एक व्‍यक्ति से यह प्रश्‍न किया। उसने जवाब दिया। अपने प्रेयशी को गिफ्ट देने का दिन है वेलेनटाईन डे। हमने फिर एक प्रश्‍न दागा। ऐसी क्‍या बात है कि लोग आज ही के दिन अपने प्रेयशी को गिफ्ट देते हैं। वह व्‍यक्ति चुप हो गया। उसके पास कोई जवाब नहीं थे। तब हमने कहा। आप नहीं जानते हैं मैं बताता हूं आपको क्‍या है वेलेनटाईन डे।
हमने कहा जानते हैं जिस अंग्रेजों को भगाने के लिए हमारे देश के क्रांतिकारियों ने अपने प्राण गंवा दिये उसी अंग्रेज के जन्‍म दिन को वेलेनटाईन डे के रूप में मनाते हैं। वह व्‍यक्ति बोला ऐसी बात है तो हम कभी नहीं वेलेनटाईन डे मनायेंगे।
यही बात है जो लोग वेलेनटाईन डे मनाते हैं। शायद वह भारतीय कहलाने लायक नहीं हैं। हम क्‍यों अंग्रेज के जन्‍म दिन को मनायें।
मेरा शहर है तो बहुत छोटा  लेकिन है बड़ा रमणीक स्‍थल। मेरे शहर के आसपास प्रकृति का सौंदर्य बिखेरने वाले दर्जनों पहाड़ पर्वत हैं। मैं वेलेनटाईन डे के दिन घूमने निकला। मेरे शहर से 2 किमी की दूरी पर एक छोटा सा पहाड़ है नंदन पहाड़। वहां हमने देखा कई जोड़े छुप छुप कर बैठे हुए थे। आखिर क्‍यों भाई। वेलेनटाईन डे स्‍पेशल क्‍यों। कई दिन हमारे समाज में हैं। पत्नियां अपने पति की सलामती के लिए कई कठिन से कठिन व्रत रखती हैं। वो रखो। वेलेनटाईन डे क्‍यों।
आखिर इन्‍हें समझाये कौन। ऐसा करने वाले के मां बाप भी तो इसी संस्‍कृति में चलने की चेष्‍टा करते हैं। पता नहीं हमारी संस्‍कृति का क्‍या होगा।
 लोगों को इसके बारे में सोचना होगा।
इसके लिए लोगों को आगे आना होगा।
यह तभी संभव है जब हम और आप जागृत होंगे। बिना जागृति के कोई कार्य संपन्‍न नहीं हो सकता। वह अधूरा ही रह जायेगा। अंग्रेजी संस्‍कृति को छोड़ना होगा। इसके लिए हमें संकल्‍प लेना होगा।
जय भारत
जय हिन्‍दुस्‍तान
जय हिन्‍दी
जय हो।।।।।

1 टिप्पणी:

prasun kumar mishra ने कहा…

ऐसे सैकड़ों टाइने और डे आते रहे हैं और आएंगे भी और किसी न किसी वैली में समा जाएंगे। पहले भी कई देशों में आए और वहां बदलाव हुआ लेकिन भारत में ये आते रहे हैं और खप जाते रहे हैं...बस जरूरत है संस्कृति के प्रति संकल्प लेकर आगे चलने वालों जो संकल्प जैसी पहले के माध्यम से हो रहा है...इसलिए हम कहते हैं कुछ तो हैं कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।